होली(holi)

होली(holi)
भक्त प्रहलाद के बचने की याद में होली मनाई जाती हैं
संक्षिप्त कथा:- हिरण्याकश्यपु के बेटे का नाम प्रहलाद था | हिरण्यकश्यपु अपने राज में केवल अपने आप को ही भगवान बनाकर पब्लिक से पूजवाता था और विरोध करने वाले मार देता था ,जब प्रहलाद को पता चला कि भगवान उसके पापा नहीं बल्कि कोई और हैं तो वह गुरु बनाकर भगवान की भक्ति करने लगा,जब हिरण्याकश्यपु को पता चला कि मेरा बेटा और को पूजने लग गया है तो उसने प्रहलाद को मारने के लिए कई यातनाएं दी ओर एक दिन अपनी बहन होलिका को कहा हैं कि तुम्हें वरदान है कि तुम जलोगी नहीं तो अग्नि जलाकर उसमें बैठ जाओ और  तुम प्रहलाद को लेकर अपनी गोद बिठा लो ताकि यह मर जाए ,तब होलिका ने ऐसा ही किया लेकिन भक्त प्रहलाद परमात्मा की भक्ति के कारण जला नहीं और उल्टी होलिका ही जल गई ,तब से होली एक त्यौहार के रुप में मनाया जाता हैं लेकिन भाईयों असली होली का त्यौहार आप रोज परमात्मा की भक्ति करके मना सकते हो,रंग फेकना,नाचना, कूदना होली मनाना नहीं होता बल्कि सतगुरु जी से नामदीक्षा लेकर भक्ति करना ही असली होली मनाना हैं जिससे आपको प्रहलाद की तरह लाभ होंगे लेकिन वर्तमान में वह.सतगुरु जी कौन है❓उनकी क्या पहचान है ❓
"गुरू ब्रह्मा, गुरुर विष्णु, गुरुर देवो महेश्वर:
गुरुर साक्षात् 🍂परम ब्रह्म:🍂 तस्मै श्री गुरुवे नम: "
अभी तक लगभग सभी धर्मगुरुओ को यह ही नहीं पता कि इस श्लोक मे आए परम ब्रह्म कौन है❓
और कथा पाठ करके सारे संसार को मूर्ख बना रहे हैं तथा रुपये लूट रहे हैं | कहते हैं कि मनुष्य जीवन 84 लाख प्रकार की योनियों में जाने के बाद मिलता हैं जबकि ये धर्मगुरु अनमोल मनुष्य जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं और भोली पब्लिक इनकी बातो मे आकर गलत भक्ति करके मनुष्य जीवन बर्बाद कर रही हैं ,गीता मे कहा है कि हे अर्जुन,परमात्म ज्ञान की प्राप्ति के लिए तत्वदर्शी संतों की शरण में जाना होगा(गीता अध्याय 4 श्लोक 34)
तो भाईयों सोचने की बात है कि क्या सारे धर्मगुरु ही तत्वदर्शी संत हैं???????
नहीं,हकीकत मे यह नहीं हो सकता है | जब भगवान एक हैं तो उसकी प्राप्ति कराने वाले सतगुरु भी एक ही है,यह बात स्वयं भगवान ने बताई है
जानने के लिए visit करें👉www.jagatgururampalji.org
और पुस्तक ज्ञान गंगा या अन्य पुस्तकें फ्री मे डाडनलोड करके पढे़ तथा प्रतिदिन सत्संग देखे साधना टीवी📺पर रात 7:30 से 8:30 तक तथा गीता तेरा ज्ञान अमृत ,ज्ञान गंगा, जीने की राह पुस्तक घर बैठे नि:शुल्क प्राप्त करने के लिए अपना पूरा नाभ,पता, मोबाइल नंबर सहित लिखकर निम्न नंबरो पर वाटसप करें👉7496801825www.jagatgururampalji.orgwww.jagatgururampalji.org

Comments

Popular posts from this blog

एक मासूम

साहेब

Valentine Day Special