साहेब
कबीर साहेब चारों युगों में आते हैं सतगुरु पुरुष कबीर हैं, चारों युग प्रवान। झूठे गुरुवा मर गए, हो गए भूत मसान।। ”सतयुग में कविर्देव (कबीर साहेब) सतसुकृत नाम से प्रकट हुए थे, ”त्रेतायुग में कविर्देव जी (कबीर साहेब जी) मुनिन्द्र नाम से प्रकट हुए थे, ”नल तथा नील को शरण में लेना“ ”द्वापरयुग में कविर्देव जी(कबीर साहेब जी) करूणामय नाम से प्रकट हुए थे, ”द्वापर युग में कबीर साहेबजी ने रानी इन्द्रमति को शरण में लिया था, ”कबीर साहेब जी (कविर्देव जी) का कलियुग में कबीर साहेबजी नाम से ही प्रकट हुए थे“ विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा सुबह-सुबह ब्रह्ममुहुर्त में वह पूर्ण परमेश्वर कबीर (कविर्देव) जी स्वयं अपने मूल स्थान सतलोक से आए। काशी में लहर तारा तालाब के अंदर कमल के फूल पर एक बालक का रूप धारण किया। अधिक जानकारी के लिए आप देखे प्रतिदिन साधना टीवी पर रात 7:30 से 8:30 तक, ईश्वर टीवी पर रात 8:30 से 9:30 तक, वृंदा टीवी पर रात 9:30 से 10:30 तक