दहेज:एक कुप्रथा
दहेज से अनेक बहन-बेटियों का घर उजड़ चुका है फिर भी बिना ज्ञान के लोग दहेज की मांग करते हैं जिससे वही लोकोक्ति सिद्ध होती हैं👉"लकीर का फकीर होना"
यानि पुराने रीति-रिवाजों को बिना सोचे समझे अपनाना ||
एक गरीब परिवार था,उसमें केवल 3 सदस्य थे -सुखदेव जी,निर्मला जी और उनकी बेटी आरजू | आरजू जब 16 साल की हो गई तो माता-पिता की चिंता बढ़ने लगी कि शादी के लिए दहेज की व्यवस्था कैसे होगी ?
2 साल बीत गए और शादी के लिए रूपयों की व्यवस्था नहीं हो.सकी तभी सुखदेवजी को मनोहर शर्मा ने एक अनमोल पुस्तक दी जिसको पढ़ने से सुखदेव और निर्मला की सारी परेशानी खत्म हो गई ,उस अनमोल पुस्तक का नाम था 👉"जीने की राह"
आखिर उस पुस्तक में ऐसा क्या था जिससे उसकी परेशानी खत्म हो गई❓
पूरी कहानी का रहस्य जानने के लिए आप भी पढ़े पुस्तक 📖जीने की राह "इस लिंक से नि:शुल्क डाउनलोड करे
www.jagatgururampalji.org
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